कितने खुशनसीब हैं ,वो बच्चे
जिनके सिर पर ,
माँ-बाप का शुभ आशीर्वाद रहे,
सदा प्यार भरा हाथ रहे,
जिन बच्चों को मिलता है ,
स्नेह और साथ माँ-बाप का,
प्रभु भी देते हैं ,दिल से उन्हें
आर्शीवाद सदा प्रसन्न रहने का।
Tuesday, June 30, 2009
Sunday, June 28, 2009
Friday, June 26, 2009
Thursday, June 25, 2009
Wednesday, June 24, 2009
Tuesday, June 23, 2009
Monday, June 22, 2009
अपराध का बोलबाला ,हर तरफ़ हो गया है,
बेखौफ होकर जीना,एक सपना सा बन गया है,
माँ की कोख से बाहर की दुनिया ,
में आने से हर बच्चा डर रहा है,
अन्याय बढ गया है,बढ गए अत्याचारी,
मजबूर हो गया हर व्यक्ति,बेबस हुई नारी,
माँ की ममता,लाज औरत की दांव पर लगी है,
पाप बढ चुका है इतना,परेशां हर शख्स हो गयाहै,
भगवान्,भी अपनी दुनिया को देख सिहर उठा है.
बेखौफ होकर जीना,एक सपना सा बन गया है,
माँ की कोख से बाहर की दुनिया ,
में आने से हर बच्चा डर रहा है,
अन्याय बढ गया है,बढ गए अत्याचारी,
मजबूर हो गया हर व्यक्ति,बेबस हुई नारी,
माँ की ममता,लाज औरत की दांव पर लगी है,
पाप बढ चुका है इतना,परेशां हर शख्स हो गयाहै,
भगवान्,भी अपनी दुनिया को देख सिहर उठा है.
Sunday, June 21, 2009
हमे अक्सर सताती हैं,बचपन की यादें,
अपने संगी-साथियों के संग ,बतियाते
बिताये ,अनगिनत दिन और रातें ,
वो बारिश में ,कागज़ की नांव बहाना ,
गुड्डे -गुडियों का ब्याह रचाना,
बागों में रंग-बिरंगी तितलियों को पकड़ना ,
न रिश्तों का बन्धन ,न कोई फ़िक्र ,न परेशानी,
वो अल्हड सा जीवन ,वो सावन के झूले,
वो चाँद को मामा कहकर बुलाना ,हम आज तक न भूले,
वो बचपन की मौज-मस्ती कैसे कोई भूले.
अपने संगी-साथियों के संग ,बतियाते
बिताये ,अनगिनत दिन और रातें ,
वो बारिश में ,कागज़ की नांव बहाना ,
गुड्डे -गुडियों का ब्याह रचाना,
बागों में रंग-बिरंगी तितलियों को पकड़ना ,
न रिश्तों का बन्धन ,न कोई फ़िक्र ,न परेशानी,
वो अल्हड सा जीवन ,वो सावन के झूले,
वो चाँद को मामा कहकर बुलाना ,हम आज तक न भूले,
वो बचपन की मौज-मस्ती कैसे कोई भूले.