Monday, June 22, 2009

अपराध का बोलबाला ,हर तरफ़ हो गया है,
बेखौफ होकर जीना,एक सपना सा बन गया है,
माँ की कोख से बाहर की दुनिया ,
में आने से हर बच्चा डर रहा है,
अन्याय बढ गया है,बढ गए अत्याचारी,
मजबूर हो गया हर व्यक्ति,बेबस हुई नारी,
माँ की ममता,लाज औरत की दांव पर लगी है,
पाप बढ चुका है इतना,परेशां हर शख्स हो गयाहै,
भगवान्,भी अपनी दुनिया को देख सिहर उठा है.

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