Friday, June 19, 2009

बचपन खेल-कूद में बिता दिया,
मदहोशी में जवानी को गँवा दिया,
बुढापे ने शरीर को थका दिया,
ज़िन्दगी की शाम होते ही,
बहुत से अपनों ने भुला दिया,
आपाधापी में जीवन की,ख़ुद
को कभी वक़्त न दिया,बहुत
सी अधूरी ख्वाहिशों को पूरा
न कर पाने की हसरत ने आज ,
हमे ज़ार-ज़ार रुला दिया.

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