सावन का आगमन होते ही,
बागों में नाचने लगते हैं मोर,
हरियाली दिखती है,चारों ओर,
खामोशियाँ गुनगुनानें लगती हैं,
तन्हाईयाँ मुस्कुरानें लगती हैं,
हमारी बेचैनियों करार पा जाती हैं,
इन आंखों को,जब हो जाता है दीदार तुम्हारा,
कैसे बताएं ,खिल उठता है दिल का गुलिस्तान हमारा।
No comments:
Post a Comment