किसी के लिए अपना मन बेचैन कर लेते हैं ,
न जाने क्यों कभी-कभी,
उसके बिना जीवन का हर अधूरा लगने
लगता है कभी-कभी,
सपनों की दुनिया से बाहर आकर देखो,
हकीक़त का सामना होगा तभी।
Friday, July 31, 2009
Wednesday, July 29, 2009
कभी-कभी जो दे नहीं पाते कोमल फूल,
खुशी ,वो मिल जाती है काँटों की चुभन से,
तुम्हारी बेरुखी ने ग़मों के साथ-साथ हमें
हौंसले भी बेहिसाब दियें हैं,
समझना नहीं चाहता मन न जाने क्यों,
जन्मों का साथ निभाता है कौन,
प्यार के धागे जो बांधे ,हमने तुमसे,
लाख कोशिशों के बाद भी हो न सके मजबूत,
हम तो दिल ही दिल में तुमसे बन्धन बाँध बैठे अटूट।
खुशी ,वो मिल जाती है काँटों की चुभन से,
तुम्हारी बेरुखी ने ग़मों के साथ-साथ हमें
हौंसले भी बेहिसाब दियें हैं,
समझना नहीं चाहता मन न जाने क्यों,
जन्मों का साथ निभाता है कौन,
प्यार के धागे जो बांधे ,हमने तुमसे,
लाख कोशिशों के बाद भी हो न सके मजबूत,
हम तो दिल ही दिल में तुमसे बन्धन बाँध बैठे अटूट।
