Monday, April 20, 2009

किसी न किसी बन्धन ने बाँध रखा है ,हर आदमी को
बचपन से लेकर ,बुढापे तक
जीवन को भी ,और मृत्यु को भी ,
शायद, मरने पर ही छूट पाता है ,
रिश्तों के जाल से, मुक्त हो पाता है,
जीवन के जंजाल से ।

No comments:

Post a Comment