Monday, April 20, 2009

नियम पूर्वक चलता चक्र प्रकृति का,
आती बदल -बदल कर ऋतुएं सारी ,
सूरज और चाँद भी छुप जाते ,
खेलकर अपनी -अपनी पारी ,
दिन के शुरू होने पर ,करने लगते सब काम ,
रात होने पर ,सो जाती ये दुनिया सारी ।

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