"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Tuesday, April 21, 2009
ठान ले मन में ,गर ,तो क्या नहीं कर सकता इंसान ज़मीन तो क्या ,हौंसलों से अपने वो छू सकता है आसमान हार को अपनी ,जीत में बदल सकता है वो, हर शूल को डगर से हटा कर चल सकता है वो, सूझ -बूझ से वैर को बदल कर प्रेम में , इस धरती की शक्ल-सूरत बदल सकता है वो।
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