Wednesday, July 28, 2010

सावन जब भी आता है,
साथ हर्षो-उल्लास लाता है,
ठंडक भरी,हवाएं चलने लगतीं हैं,हर ओर
और मस्ती करने लगतीं,घटाएं मचा के शोर,
उस पर नन्ही-नन्ही वर्षा की बूंदों का गिरना,
मन बेचैन होने लगता है,मिलने को अपने मीत को,
कौन समझाए उस बैरी को,असीम प्रीत की तड़प को|

1 comment:

  1. सावन की सुन्दर कवितारूपी परिभाषा दी है आपने तो .....बधाई स्वीकारें ....!!!

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