Tuesday, July 27, 2010

हे दो हाथ वाले मनुष्य,तू सौ हाथों वाला होकर धन संग्रह कर,सौ गुनी शक्तिसे धन-धान्यादी ऐश्वर्यों को इकठा कर.परन्तु इस उपार्जन किये हुए अपने धन को हज़ार हाथों वाला होकर,सत्पात्र को दान कर दे|

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