Saturday, April 30, 2011

हर पल को आकर,गुज़र जाना है,
हर खिलनेवाले फूल को,इक दिन 
मुरझा जाना है,
हर मौसम को बदलकर,
आगे बढ़ जाना है,
हर नई सुबह को,
रात में बदल जाना है,
संसार में जन्मे हर प्राणी को,
इक न इक दिन सबकुछ छोड़ जाना है|

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