Friday, April 22, 2011

आसमान नीला ही दिख रहा था,
वहां से भी,
पेड़-पौधे भी हरे दिखते थे,
फूलों के रंग भी चटक थे,
फर्क था तो बस,आँखों में बसे सपनों का,
जो अपने तो थे,पर उनका,
अपनों के देखे हुए सपनों से कोई सरोकार न था|

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