Wednesday, March 2, 2011

गुलाब का फूल,एक रोते हुए आदमी को देखकर बोला-तू सब कुछ होते हुए भी रोता है,मुझे देख,मैं तो काँटों में खिलकर भी मुस्कुराता हूँ|छोड़ दे ये रोना-धोना,और और कर आगे का सफ़र तय कर हँसते हुए,क्योंकि दाता ने ये चुनौतियों भरा जीवन दिया है,हिम्मत से जीने के लिए|मुसीबतें  तो आएंगी जीते जी,तू सामना कर उनका,और तू काबिल बना अपना जीवन,सफलतापूर्वक जीने के लिए|

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