We keep achieving goals without really spending any moments appreciating our acquisitions.
उलझनें कैसी हैं ये,
जो सुलझ के भी सुलझती नहीं,
मुश्किलें कैसी हैं ये,
जो हटकर भी हटती नहीं,
रिश्ते कैसे हैं ये,
जो दूर रहकर भी दूर होते नहीं,
न जाने,कैसा सम्बन्ध है,
आंसूओ का इन आँखों से,न दुःख में
न सुख में,इक दूजे से जुदा होते नहीं|