Sunday, November 7, 2010

उलझनें कैसी हैं ये,
जो सुलझ के भी सुलझती नहीं,
मुश्किलें कैसी हैं ये,
जो हटकर भी हटती नहीं,
रिश्ते कैसे हैं ये,
जो दूर रहकर भी दूर होते नहीं,
न जाने,कैसा सम्बन्ध है,
आंसूओ  का इन आँखों से,न दुःख में
न सुख में,इक दूजे से जुदा होते नहीं|

1 comment:

  1. कविता बहुत अच्छी है .
    ऐसा लगता है की गहन चिंतन के बाद ही ये कविता लिखी गयी है अगर आप को इन प्रश्नों का जवाब कभी मिल जाये तो उसे कविता के माध्यम से जरुर बताईयेगा.

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