Tuesday, July 13, 2010

paap hai parpeeda


एक व्यक्ति बारह वर्ष तक काशी में पढ़ कर आया|पत्नी ने उसके स्नान के लिए गर्म पानी तैयार किया|जब वह स्नानगृह में गई तो उसने देखा,की वहां हज़ारों चींटियाँ रेंग रही थी|चींटियाँ कहीं बेमौत न मर जाएं,यह सोचकर उसने नहाने कोई बर्तन दूसरे स्थान पर रख दिया|पति ने पूछा-"नहाने के स्थान पर बर्तन क्यों नहीं रखा?"
पत्नी बोली-"वहाँ बहुत चींटियाँ घूम रही थी,इसलिए  दूसरे स्थान पर रख दिया|"पति बोला-"तुम पढ़ी-लिखी हो ,पर बात मूर्खता की करती हो|क्या हम उन चींटियों के पालनहार हैं?हम किस-किस की चिंता करेंगे?"
पत्नी ने कहा-"बारह वर्ष तक आपने विद्या-अध्ययन किया,उस विद्या का क्या लाभ,जिससे इतनी भी समझ न आई की दूसरों को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए|यह विद्या नहीं,कोरा भूसा है|"
यह सुनकर पतिको अपनी कमी का अहसास हुआ और उसने अपनी गलती के लिए अपनी पत्नी से क्षमा मांगी|


Honestly confront what you hate about your existence and all the things that frustrate you.When you overcome these obstacles,you will begin to find peace.

कभी-कभी ऐसा लगता है,
मुखौटे,पहन रखें है सबने,
झूठ और फरेब के,
कोसों दूर है,
प्रेम और हमदर्दी जिनके दिल से,
न जाने क्यों दम भरते हैं,
दुःख-तकलीफ में साथ निभाने का,
क्या भरोसा है,
पल-पल में बदलने वाले,इस ज़माने का|
Our body has been gifted to serve others.You must firmly resolve not to take care of yourself but also others.Unfortunately ,man does know what service means.The essence of all eighteen puranas can be summarised in two short sentences.Help Ever.Hurt Never.
लहरों की बेचैनी को,
बस सागर समझता है,
धरती की बेचैनी को,
बस बादल समझता है,
जैसे अपने बच्चे की पीड़ा को,केवल 
एक माँ का दिल समझता है,
और मेरे मन की तड़प को,
सिर्फ तुम्हारा मन समझता है|