Tuesday, July 13, 2010

लहरों की बेचैनी को,
बस सागर समझता है,
धरती की बेचैनी को,
बस बादल समझता है,
जैसे अपने बच्चे की पीड़ा को,केवल 
एक माँ का दिल समझता है,
और मेरे मन की तड़प को,
सिर्फ तुम्हारा मन समझता है|

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