हर वृक्ष की हर डाली में,
समाया है,अनुपम सौन्दर्य
इन का हर पत्ता,
बनाया है,प्रभु ने बड़े यत्न से,
शायद तभी,ये खड़े है तन के,
कभी लगता है,
विनम्रता से भरे हैं,ये विशालकाय वृक्ष,
फल,फूल,छाया अपनी दे-देकर थकते नहीं,
कुछ इंसान इन्हें काटते हुए,प्रभु से भी डरते नहीं|
lovely!
ReplyDeletelittle sis