Monday, December 6, 2010

तुम्हारे प्रेम से,
रौशन है जहाँ हमारा,
तुम्हारा प्रेम ही तो,
है,हमारे जीने का सहारा
हवाओं में,खुशबू की तरह
घुला है,प्यार तुम्हारा
गुलिस्तान बन चुका है,जीवन
फूलों की तरह,जिसमे महक रहा है प्यार तुम्हारा|

1 comment: