Saturday, October 30, 2010

छलकती  हुई आँखें देखो किसी की,
बिन पूछे समझने की कोशिश करना,
ये बेरुखी है,किसी अपने की
ये मौन सीभाषा है ,किसी टूटे हुए सपने की,
कुछ दबे हुए जज्बात हैं,
कुछ खोए हुए एहसास हैं,
ऐसी बातें हैं,जो हम कह नहीं पाए,
ऐसी बातें हैं,जो हम सह नहीं पाए,
कुछ अधूरी तमन्नाएं हैं,नादान दिल की,
कुछ हसरतें,ऐसी,जो कभी न हो सकी पूरी,
छलकती हुई आँखें..........

2 comments:

  1. दिल का दर्द सुने दिलवाला ...
    बस अपनी भी ठीक यही व्यथा है...
    बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति है....
    धन्यवाद, साझा करने के लिए...

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