Tuesday, October 5, 2010

न सूरज के उगने का पता,
न उसके अस्त होने का,
साँसे तो चल रही हैं,
दुनियावालों के लिए,
पर कहाँ है,एहसास जिन्दा होने का,
दिन-रात उठ रहें हैं,हाथ मांगने को दुआ,
जैसे इंतज़ार है,हर पल कोई चमत्कार होने का,
ऐ खुदा रहम कर,दूर कर दे 
ये अनजाना सा डर,उस जान से प्यारे को खोने का|

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