Thursday, September 30, 2010

टूटने मत दीजीये,सम्बन्ध 
प्यालों की तरह,
आंच देंगें,सर्द हवाओं में 
दुशालों की तरह,
कांपती लौ की तरह,
जलकर बुझे,बुझकर जले 
वो,जिन्हें तमन्ना थी जलने की
मशालों की तरह|

2 comments:

  1. प्यालों की तरह,
    आप की रचना चोरी हो गयी ........ यहाँ देखे :--
    http://chorikablog.blogspot.com/2010/09/blog-post_7157.html

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  2. अच्छी पंक्तिया लिखी है ........

    इसे पढ़े और अपने विचार दे :-
    क्यों बना रहे है नकली लोग समाज को फ्रोड ?.

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