Sunday, September 5, 2010

सागर का किनारा हो,
और बस साथ तुम्हारा हो,
चंदा की शीतल चांदनी हो,
और  बस साथ तुम्हारा हो,
बूंदों की बरसती हो,ठंडी फुहार,
और बस मेरे हाथ में हाथ तुम्हारा हो....

1 comment:

  1. अच्छी पंक्तिया है ....

    http://oshotheone.blogspot.com/

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