Saturday, September 4, 2010


सब शिकवे-शिकायतें उनसे थी,
सब रूठना -मानना उसका,उनसे था,
हंसी-ठिठोली,वोह अल्हड़पन 
सब छूट गया,
साँसें तो चलतीं हैं,अब भी
दिल तो धड़कता है,अब भी,
पर उनसे बिछुड़ते ही,उसे  ऐसे लगा 
जैसे कल-कल बहती नदी का पानी सूख गया|

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