Sunday, June 6, 2010


मेघों ने बरसकर,
धरती पर बड़ा उपकार किया है,
चिलचिलाती गर्मी की उमस को,
कुछ कम कर दिया है,
पेड़-पौधों की बढ जाती है मुस्कान कितनी,
बरसतीं है,वर्षा की बूँदें बेहिसाब जितनी|

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