Tuesday, May 11, 2010

ठंडी हवा हौले-हौले बहकर,
देती है कितना सुकून,
सूरज अपनी किरणों के तेज़ से,
करता है रौशन सारा जहां,
रंग-बिरंगे फूल खिलकर ,
प्रफुल्लित करते है मन को,
चंदा की चांदनी,
शीतलता प्रादान करती सबको,
प्रभु की द्यालता तो देखो,वो
कैसे कृपा बरसा रही हम सबपर |

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