Tuesday, April 27, 2010


काम के तले ,दबकर रह गया बचपन उसका,
छूट गए सब संगी-साथी,और हर खिलौना उसका,
क्यों नन्हे हाथों में,थमा दी इतनी जिम्मेदारियां,
उसकी हंसने,खेलने -खाने के दिनों को बनाकर बोझ,
क्या मिला तुम्हे,उस मासूम के बचपनको,अपने पैरों तले रौंद|

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