Monday, January 25, 2010

काँटों से भरी हैं जीवन की राहें,
सार्थक जीवन जीना नहीं आसान,
कहीं बेशुमार उलझनें हैं,किसी के जीवन में 
तो कहीं जीवन बन चुका है,स्वंय एक उलझन,
दुखों और कठिनायों से गुज़रकर ही,
सीख पाता है,जीवन का सही अर्थ इंसान|

No comments:

Post a Comment