Wednesday, January 13, 2010

न जाने क्यों बचपन भुलाए नहीं भूलता,
दिन-भर गिल्ली-डंडा खेलना,
तितलियों के पीछे-पीछे भागना,
कभी पतंग उड़ाना,तो कभी कागज़ की 
नाव को पानी में तैराना,
घंटों अपने संगी-साथियों के साथ बतियाना,
वो चंदा को मामा कहकर बुलाना,
न जाने क्यों बचपन.........

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