Monday, January 11, 2010

त्याग,प्रेम,करुणा की देवी बनकर 
नारी ने बड़े दुःख हैं सहे,
 पर अपने ऊपर हो रहे अत्याचार 
को देखकर वो चुप क्यों रहे,
क्यों न वो अपने अधिकारों की
रक्षा केलिए आवाज़ उठाए,
जागो नारी,शक्ति बनकर,
तुम भी जीना सीखो,
शान से सिर उठाकर|

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