Friday, January 8, 2010

सूरज और चाँद का अम्बर पर आना,
कितना सुख देता है हमें,
हवा घुंघरू बाँध के छम-छम करती आती है,
सुकून कितना मन को देकर जाती है,
ये ऊंचे पहाड़,ये नदियाँ,ये झरने,
हरियाली का बिछोना ओढ़े है खड़ी ये
 धरती,प्रकृति के बेमिसाल रूप के क्या कहने|

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