Friday, September 18, 2009

Do not wait for your ship to come in,go out for it.
उम्र क्या है,
संसार में आने से लेकर ,
जाने का सफर ही तो है,
समय के बन्धन में तो,
बंधे है ,चाँद-सूरज भी,
फूलों का खिलना,और मुरझाना भी,
पशु-पक्षी और ऋतुओं का आना-जाना भी,
धूप का खिलना और बादलों का आसमान पर छाना भी।

शिकायत नहीं,हमें ज़माने से,
न किसी अपने से, न बेगाने से,
इरादे गर हों,समंदर से गहरे,
तो क्या कोई बैठाएगा,पहरे ,
आंखों में हों सपने सलोने,
दिल में उन्हें पूरा करने का गर हो जूनून,
ऐसा कुछ नहीं,जो पाना हो ,नामुमकिन।
समय की धारा के साथ चलो,प्रसन्न रहने के लिए।