Monday, December 28, 2009

न जाने किस निर्मोही ने बनाई होगी 
रीत,बेटियों के ससुराल जाने की,
बाबुल का अंगना और माँ का 
आँचल सूना कर जाने की,
अपने दिल का टुकड़ा दूसरों को सौंपना 
आसान नहीं होता,
अपनी पाली-पोसी बेटी से बिछुड़ना एक,
बनवास से कम नहीं होता|



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