Sunday, December 20, 2009

सूर्य भर लाता है,बहुत सा उजाला अपनी झोली में,
अन्धकार को मिटाने केलिए,
हवाएं भर लाती हैं,ताजगी के झोंके अपने दामन में,
सुस्ती और आलस्य मिटाने केलिए,
सुंदर पेड़-पौधे और फूल,अपने रंग-रूप और खुशबू से,
कोशिश बेजोड़ करते हैं ,धरती से कुरूपता मिटाने की,
ये धरती,स्वर्ग से भी सुंदर हो जाए ,यदि हम सब 
सच्चे मन से प्रण करें,अपने अवगुणों को मिटाने की|

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