Monday, December 21, 2009

ऐसा प्रीत का सावन देखा,
तुम्हारी आँखों में,
जो टूट के बरसने को बेचैन है,
ऐसा भावनाओं का समुन्दर देखा,
तुम्हारे दिल में,
जो बहुत कुछ कहने को तरस रहा है,
मैं धन्य हूँ,देखकर वो असीमित प्रेम,
जो निरंतर तुम्हारी आँखों से बरस रहा है|

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