Thursday, October 8, 2009

चांदनी गुनगुनाने लगती है,
शहनाइयाँ बजने लगतीं हैं,
चिड़ियाँ चहचहाने लगतीं हैं,
कलियाँ मुस्कुराने लगतीं हैं,
सुन के,आहट तेरे आने की,
तू सपने में भी न सोचना 
कभी,हमसे दूर जाने की|

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