Friday, October 2, 2009

द्वार खोल दो मन के,
प्रभु को पाना हो गर,
छल-कपट बाहर करदो ह्रदय से,
भक्ति का निर्मल जल बहाना हो गर,
मोह-माया को दूर करो,खुद से ,
प्रभु के प्रेम में,रम जाना हो गर,
लोभ,द्वेष और नफरत को बाहर करो जीवन से,
शान्ति और सच्चा सुख पाना हो गर|

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