Thursday, October 1, 2009

सांझ-सवेरा आते है,बदलकर
अपनी-अपनी बारी,
इंसान जिसे अपना घर समझकर
रह रहरहा,
वह तो उसके सफ़र का है एक पड़ाव,
जहाँ से प्रस्थान करने की उसे,
शीघ्र ही करनी होगी तैयारी|

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