Wednesday, September 9, 2009

आशा ,उम्मीद न छोड़ो तुम ,
बेरुखी से,कभी भी,
दिल किसी का न तोड़ो तुम,
जीवन में ,केवल खुशियों से ही नहीं ,
ग़मों से भी नाता जोडो तुम,
भूलकर दुःख-दर्द अपने,
देखो दूसरों केलिए भी सपने,
ख़ुद के लिए सदा जिए हो,
कभी दूसरों के लिए जीकर तो देखो तुम।

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