दस्तक देता है ,हर किसी का नसीब कभी न कभी,
यह और बात है,इस तरफ़ कितना ध्यान देता है कोई ,
जो कर्मवीर होते हैं,वही सुनते हैं,वक़्त की आवाज़,
सत्कर्म करके,संवारते है अपना और दूसरों का नसीब,
कुछ लोग तो सोचते ही रहते हैं,कुछ नहीं करते ,
दोष देतें है दूसरों को,अपनी विफलताओं का,
गिले-शिकवों की दुनिया से बाहर,कभी नहीं निकलते।
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