Thursday, August 6, 2009

बेबस बुढापे की तस्वीर ने आज झकझोर दिया,
अपने होने का दावा करनेवाले ने उनका साथ छोड़ दिया,
चेहरे पर हँसी है,आँखें थी नम,तन्हाई और अकेलेपन का संग है,
किन कर्मों की मिली सजा,अपना शरीर भी देने लगा दगा है,
हर पल रब से अपने पास बुलाने की मांगते दुआ
किस्मत ने रोने दिया,और हंसनें दिया.

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