सपने -सलोने आंखों में कितने पलें ,
कभी- कभी पलकें बोझिल होने लगती
हैं उनके बोझ के तले ,
जिंदगी में जो अधूरी रहीं ,ऐसी ख्वाहिशें हैं हजारों,
भटक रहा ,परेशान होकर तृष्णाओं के पीछे हर इंसान,
जिन हसरतों ने पूरी होकर ,
बरसाईंखुशियाँ न जाने क्यों ,उनसे अनजान रहा इंसान।
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