रात ने कुछ मायूस होकर ,
सुबह से ये कहा,क्यों हर
कोई बेसब्री से कर रहा ,
तुम्हारे होने का इंतज़ार,
जानती हूँ,उजाले से नहा उठती है,
धरती तुम्हारे आने पर,
हजारों कलियाँ खिल उठती हैं ,
बागों में,तुम्हारे आने पर,
चिडियां और भंवरें गाने लगतें हैं,
फिज़ाओं में तुम्हारे आने पर,
सुबह ने हंसकर कहा ,तेरा और
मेरा तो चोली-दामन का साथ है,
तू नहीं ,तो जग में मेरी क्या बिसात है.
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