"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Sunday, May 24, 2009
क्षणभंगुर होकर भी ,पानी का बुलबुला देता ,बहुत सा ज्ञान, आपाधापी में जीवन की ,असली मूल्यों को भूल गया इंसान, तेरे मेरे में लगा रहा,मोह माया में फंसा रहा ,जैसे आँखें मूंदकर , प्रकृति के सुंदर रूप से होकर अनजान।
इंसान जीवन भर तेरे मेरे के खेल में ही लगा रहता है और एक दी अचानक बुलबुले की मानिंद नष्ट हो जाता है...कहाँ कोई सीख लेता है वो..! .अच्छी अभिव्यक्ति...
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