Saturday, May 23, 2009

किसी का दर्द ,महसूस होते ही ,
बरसने लगते हैं ये नैन ,
कभी कभी ,मन की बात ,
को कह नहीं पाते ये नैन,
लाख समझाते हैं,फिर भी,
कहाँ मानते हैं ,ये नैन,
शायद,कभी कभी मजबूर ,
और बेबस हो जाते हैं ये बाँवरे नैन।

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