"MY IMAGINATION WILL GO FAR AND WIDE FROM ONE TIDE TO ANOTHER TIDE"
Tuesday, May 12, 2009
न जाने ,हर पल कौन सी डोर, खींचती है ,मुझे तुम्हारी ओर, न जाने क्यों लगता है जैसे, पुकार है तुम्हारी, कोयल की कुहू में, पपीहे की पिहू में , भंवरे की गुनगुनाहट में, और प्रकर्ति के हर रंग में ।
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