प्रकृति के हैं रूप अनेक,
जल झरनों ,तालाबों का करता है जीवन संचार,
उफान आने पर,यही मचा देता है हाहाकार,
हवा,हौले-हौले बह कर देती है सुकून,
कभी आंधी बनकर,छीन लेती सुकून, वैसे ही
सज्जन इंसान करता है सबका कल्याण,
लेकिन कभी -कभी वह बन जाता है,शैतान
दरिंदा ,बनकर उजाड़ देता है कई आशिआं ।
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