Thursday, April 23, 2009

मुस्कराहट लबों पर आती है ,पर अक्सर रुला के जाती है,
दिल के पास से ,जब भी तेरी यादों की हवा गुजर जाती,है
हर पल सोचती हूँ ,क्या करूँ ,कैसे याद आऊँ तुझे,
ज़िन्दगी की राह में, चले दोनों साथ थे ,
तुम्हे मंजिल मिल गई,रह गई मैं बीच राह में।

No comments:

Post a Comment