Sunday, April 12, 2009

दीप खुशियों के यूहीं जलाते रहना तुम,
मुस्कराहट अपनी यूहीं लुटातें रहना तुम,
हमसे दूर रहो ,या पास हमारे रहो तुम
हृदय में हर किसी के यूहीं फूल खिलाते रहना तुम.

1 comment:

  1. वाह जी वाह थोडी सी लाईनों में बहुत बडा पाठ पढा दिया आपने

    बेहतरीन

    आप सभी को बैसाखी पर्व दी लख लख बधाईयां

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