Wednesday, April 22, 2009

समझ के भी न समझे ,कभी हम तुम्हे,
मांगे थे तुमसे ,प्यार के दो लम्हे ,
मुस्कुराहटें बांटी है ,सदा,
चाहतों ने हमारी ,
तुम्हारी बेरुखी ने कभी ,
हमारी हसरतों के फूल न खिलने दिए,
दिल की बगिया में हमारी।

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